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स्कूल की डराने वाली गतिविधि से बच्चे रोने लगे, विशेषज्ञों ने सुझाया सही तरीका
उत्तराखंड के खटीमा में एक स्कूल ने स्क्रीन समय के खतरों से अवगत कराने के लिए ऐसी गतिविधि आयोजित की जिससे बच्चों में भय और आतंक फैल गया। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लत से निपटने के लिए संवेदनशील और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
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उत्तराखंड के खटीमा स्थित आदर्श इंडिया मॉन्टेसरी स्कूल में बच्चों को मोबाइल फोन और स्क्रीन समय के प्रभाव के बारे में समझाने के लिए एक गतिविधि का आयोजन किया गया। हालांकि, इस कार्यक्रम के दौरान बच्चों को डराने वाली परिस्थिति का सामना करना पड़ा, जिससे वे आतंकित होकर रोने लगे।
स्कूल का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना था। लेकिन इस दृष्टिकोण के कारण छोटे बच्चों में भय और चिंता की स्थिति पैदा हो गई, जिससे शिक्षकों और अभिभावकों में चिंता का माहौल बन गया।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरणों की लत से निपटना वाकई एक गंभीर मुद्दा है। हालांकि, इस समस्या का समाधान भय या आतंक के जरिए नहीं बल्कि सकारात्मक और शिक्षणीय तरीकों से किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य पेशेवरों के अनुसार, माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के साथ खुली बातचीत करनी चाहिए और उन्हें संतुलित दैनिक दिनचर्या बनाने में मदद करनी चाहिए। बच्चों को शारीरिक गतिविधियों, खेल-कूद और सामाजिक समय को प्रोत्साहित करने से भी डिजिटल लत में कमी लाई जा सकती है।