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डिजिटल स्वास्थ्य और साक्षरता को स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए: शिक्षकों का आह्वान
शिक्षकों का मानना है कि डिजिटल स्वास्थ्य और संबंधित साक्षरता को स्कूली पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। यह कदम छात्रों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने में सक्षम बनाएगा।
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भारत के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविदों ने जोर देकर कहा है कि डिजिटल स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान और दक्षताओं को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना अत्यावश्यक है। उनका तर्क है कि आजकल हेल्थ टेक्नोलॉजी का उपयोग व्यापक स्तर पर बढ़ रहा है, ऐसे में युवा पीढ़ी को इससे अवगत कराना जरूरी है।
शिक्षकों के अनुसार, डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता से आशय सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करने, समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता से है। इसमें ऑनलाइन स्वास्थ्य संसाधनों का उपयोग, टेलीमेडिसिन, स्वास्थ्य डेटा की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं।
शिक्षाविद इस बात पर बल दे रहे हैं कि यह कौशल आज की डिजिटल दुनिया में जीवन कौशल के समान महत्वपूर्ण है। स्कूल में इसे पढ़ाने से छात्र स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचना से बच सकेंगे और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेना सीखेंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि स्कूली स्तर पर डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता को शामिल करने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार आएगा। साथ ही, यह पहल छात्रों को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करेगी।