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वैज्ञानिक की बेटी के वायरस से बना मम्प्स वैक्सीन, आज भी उपयोग में

1963 में वैज्ञानिक मॉरिस हिलेमैन ने अपनी पांच वर्षीय बेटी जेरिल लिन के गले से मम्प्स वायरस का नमूना लिया था। इसी वायरस के आधार पर विकसित वैक्सीन आज भी दुनिया भर में मम्प्स रोग से बचाव के लिए इस्तेमाल हो रही है।

LSN India · 4 October 2026

वैज्ञानिक की बेटी के वायरस से बना मम्प्स वैक्सीन, आज भी उपयोग में

चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक ऐसा किस्सा है जो एक बेटी के बीमार होने से शुरू हुआ था और आज दुनिया भर में लाखों बच्चों की जान बचा रहा है। 1963 में अमेरिकी वैज्ञानिक मॉरिस हिलेमैन अपनी पांच वर्षीय बेटी जेरिल लिन को मम्प्स से बीमार पाया। हिलेमैन ने तुरंत अपनी बेटी के गले से वायरस का नमूना लिया और इसे शोध के लिए संरक्षित रखा।

हिलेमैन की टीम ने इस वायरस को कमजोर करने का काम शुरू किया। वैज्ञानिकों ने मम्प्स वायरस को धीरे-धीरे कमजोर बनाया, ताकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर सके लेकिन बीमारी न पैदा करे। इस 'जेरिल लिन स्ट्रेन' पर आधारित वैक्सीन को 1967 में अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों से मंजूरी मिल गई।

इस वैक्सीन के आने के बाद अमेरिका में मम्प्स रोग से होने वाली बीमारियों और मौतों में भारी कमी आई। 'जेरिल लिन स्ट्रेन' पर आधारित यह वैक्सीन आज भी दुनिया के कई देशों में बच्चों को मम्प्स से बचाने के लिए दी जाती है। एक साधारण परिवार की घटना से निकला यह टीका आज सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।