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बिजली की तरंगों से धरती की संरचना का रहस्य खुलेगा
वैज्ञानिकों ने एक नई विधि विकसित की है जिससे बिजली गिरने से उत्पन्न तरंगों के माध्यम से जमीन के नीचे की परतों का विश्लेषण किया जा सकता है। यह तकनीक भूवैज्ञानिक अन्वेषण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
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नई वैज्ञानिक खोज से संकेत मिल रहा है कि बिजली गिरने के बाद उत्पन्न होने वाली तरंगें, जिन्हें 'थंडरक्वेक' कहा जाता है, धरती की आंतरिक संरचना को समझने का एक शक्तिशाली माध्यम बन सकती हैं। शोधकर्ताओं ने अपने हाल के अध्ययन में प्रदर्शित किया है कि इन भूकंपीय संकेतों को सही तरीके से व्याख्यायित करके जमीन के नीचे मौजूद विभिन्न परतों और भूगर्भीय संरचनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है।
थंडरक्वेक तरंगें वास्तव में बिजली गिरने के समय उत्पन्न होने वाली ऊर्जा से निकलती हैं, जो भूमि को कंपकंपाती हैं। इन तरंगों की विशेषता यह है कि वे धरती की गहरी परतों से होकर गुजरती हैं और परावर्तित होकर वापस आती हैं। इस तरह की जानकारी परंपरागत भूकंपीय सर्वेक्षण विधियों के समान ही उपयोगी साबित हो सकती है।
इस खोज का भूवैज्ञानिक अन्वेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुप्रयोग हो सकता है। खनिज संसाधनों की खोज, भूजल मानचित्रण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित अध्ययन में यह विधि महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि थंडरक्वेक तकनीक लागत-प्रभावी और अधिक सुलभ हो सकती है।
यह शोध भारत जैसे देशों के लिए विशेष महत्व रखता है जहां बिजली गिरने की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। इस तरह की प्राकृतिक शक्ति का विज्ञान के हित में उपयोग करना भविष्य की खोज पद्धतियों में एक नया आयाम जोड़ सकता है।