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जुराससिक काल के कीटों की आवाजें एआई से फिर से बनाईं वैज्ञानिकों ने
वैज्ञानिकों ने 16.5 करोड़ साल पहले रहने वाली नौ प्रजातियों के कीटों की आवाजें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से दोबारा तैयार की हैं। अनुसंधान से पता चला है कि कुछ कीट मानव श्रवण से परे अल्ट्रासोनिक ध्वनियां निकालते थे।
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वैज्ञानिकों ने जीवाश्मों और उन्नत तकनीकों का उपयोग करके जुराससिक काल के विलुप्त कीटों की आवाजें पुनर्निर्मित की हैं। शोधकर्ताओं ने संरक्षित कीटों के पंखों का विश्लेषण किया और लेजर माप तथा कंप्यूटर मॉडलिंग का सहारा लेते हुए इन प्राचीन प्रजातियों की संचार प्रणाली को समझने का प्रयास किया।
अध्ययन में नौ अलग-अलग कीट प्रजातियों की आवाजें फिर से बनाई गईं। इनमें से अधिकांश प्रजातियां स्पष्ट चहचहाहट वाली ध्वनियां निकालती थीं जो मनुष्यों को सुनाई दे सकती थीं। हालांकि, शोध में यह भी पाया गया कि कुछ प्रजातियां अल्ट्रासोनिक आवाजें उत्पन्न करती थीं जो मानव श्रवण रेंज से बाहर थीं।
जीवाश्मों से प्राप्त जानकारी का विश्लेषण करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग इस शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। यह तकनीकी दृष्टिकोण वैज्ञानिकों को हजारों वर्ष पुरानी जैविक संरचनाओं को समझने और उनकी कार्यप्रणाली को समझने में मदद करता है।
यह अनुसंधान प्राचीन जीवों के संचार तरीकों के बारे में हमारी समझ को गहरा करता है और विलुप्त प्रजातियों के जीवन को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है। इस तरह की खोज से विकास संबंधी जीव विज्ञान के क्षेत्र में नई जानकारी मिलती है।