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घोंघे कैल्शियम और कोलेजन से बनाते हैं पांच तरह का श्लेष्म
वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि ग्रोव घोंघे अलग-अलग उद्देश्यों के लिए पांच विभिन्न प्रकार का श्लेष्म पदार्थ बनाते हैं। कैल्शियम और प्रोटीन के स्तर इस श्लेष्म के गुणों और कार्यों को महत्वपूर्ण तरीके से प्रभावित करते हैं।
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प्रकृति कैसे साधारण घटकों से जटिल पदार्थ बनाती है, इस रहस्य को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने घोंघों का अध्ययन किया है। ग्रोव घोंघे अपनी विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए कैल्शियम और कोलेजन VI नामक प्रोटीन का उपयोग करके पांच अलग-अलग प्रकार के श्लेष्म पदार्थ का निर्माण करते हैं।
इस अध्ययन के अनुसार, इन श्लेष्म पदार्थों में से एक घोंघे को सतह पर सरलतापूर्वक चलने-फिरने में सहायता करता है। वहीं दूसरा श्लेष्म किसी सतह से दृढ़ता से जुड़े रहने का काम करता है, जिससे घोंघा अपनी स्थिति को मजबूती से बनाए रख सकता है।
घोंघे अपनी सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रकार के श्लेष्म का स्राव करते हैं। इसके अलावा, ये जीव एक विशेष पदार्थ का निर्माण भी करते हैं जो उनके खोल को बंद करने में मदद करता है, जिसे एपिफ्रेग्म कहा जाता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इन श्लेष्म पदार्थों में कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा में परिवर्तन से उनके यांत्रिक गुणों और कार्यों में महत्वपूर्ण अंतर आता है। यह खोज दर्शाती है कि प्रकृति सरल सामग्रियों के माध्यम से कितनी परिष्कृत और विविध सामग्रियां बना सकती है।