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12,000 साल पुराने मस्तिष्क संरक्षित रहे, वैज्ञानिकों ने खोजा कारण
वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्राचीन मानव मस्तिष्क हजारों वर्षों तक कैसे सुरक्षित रहते हैं। कम ऑक्सीजन वाले नम वातावरण में प्रोटीन क्रॉस-लिंकिंग की प्रक्रिया इन मस्तिष्कों को क्षरण से बचाती है।
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हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों से यह पता चला है कि कुछ प्राचीन मानव मस्तिष्क 12,000 वर्षों तक किस प्रकार संरक्षित रहते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, मृत्योपरांत मस्तिष्क के ऊतकों की सुरक्षा में ऑक्सीजन की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नए निष्कर्षों से पता चलता है कि नम और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में प्रोटीन क्रॉस-लिंकिंग की एक अनूठी जैव-रासायनिक प्रक्रिया होती है। यह क्रॉस-लिंकिंग प्रक्रिया मस्तिष्क के प्रोटीनों को आपस में जोड़ देती है, जिससे ये प्रोटीन क्षरण के विरुद्ध अधिक प्रतिरोधी हो जाते हैं।
यह खोज यह समझाती है कि जबकि मानव शरीर के अन्य ऊतक समय के साथ विघटित हो जाते हैं, मस्तिष्क के कुछ नमूने असाधारण रूप से अच्छी स्थिति में क्यों बने रहते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संरक्षण प्रक्रिया विशेष भूगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में अधिक सामान्य है।
ये निष्कर्ष प्राचीन मानव जीव विज्ञान और संरक्षण विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। अध्ययनों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि पुरातात्विक खोजों में किन परिस्थितियों में जैविक नमूने लंबे समय तक टिके रह सकते हैं।