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चमगादड़ों की लंबी उम्र का राज: कैंसर और वायरस प्रतिरोध जीन
वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि कुछ चमगादड़ की प्रजातियां 50 साल तक जीवित रह सकती हैं। उनकी लंबी आयु का कारण उनके विशेष जीन हैं जो कैंसर और वायरल संक्रमण से रक्षा करते हैं।
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जीव विज्ञानियों का एक नया अध्ययन दर्शाता है कि चमगादड़ों की असाधारण दीर्घायु उनके अद्वितीय आनुवंशिक तंत्र से जुड़ी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो जीन चमगादड़ों को कैंसर जैसी घातक बीमारियों से बचाते हैं, वही जीन उन्हें विभिन्न वायरस के संक्रमण से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
चमगादड़ों की कुछ प्रजातियां अपने शरीर के आकार के अनुपात में असामान्य रूप से लंबी उम्र प्राप्त करती हैं। जहां अन्य स्तनधारी जानवर कुछ वर्षों तक जीवित रहते हैं, वहीं कुछ चमगादड़ पांच दशकों तक जीवन जी सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जीवन काल इनके विकसित प्रतिरक्षा तंत्र का परिणाम है।
शोध से यह भी संकेत मिलता है कि चमगादड़ों के शरीर में कैंसर को दबाने वाले तंत्र विशेष रूप से मजबूत हैं। इसके साथ ही, उनकी कोशिकाएं वायरल आक्रमण के विरुद्ध उच्च स्तर की सुरक्षा बनाए रखती हैं। ये दोनों विशेषताएं आपस में जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं।
वैज्ञानिक समुदाय इस खोज को महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि यह मानव चिकित्सा के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। चमगादड़ों के आनुवंशिक गुणों को समझना मनुष्यों में कैंसर और संक्रामक रोगों के उपचार विकास में मदद दे सकता है। शोधकर्ता इन जीवों के जीन अनुक्रम का आगे विस्तार से अध्ययन जारी रखने की योजना बना रहे हैं।