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समुद्री कछुओं के घोंसलों का स्थानांतरण चिंताजनक परिणाम दे रहा है

समुद्री कछुओं के संरक्षण के लिए घोंसलों को स्थानांतरित करने से बचाव के बजाय नकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। गर्म क्षेत्रों में स्थानांतरित घोंसलों में निकलने वाले बच्चों का लिंगानुपात भारी रूप से मादा-केंद्रित हो गया है।

LSN India · 28 August 2026

समुद्री कछुओं के घोंसलों का स्थानांतरण चिंताजनक परिणाम दे रहा है

समुद्री कछुओं की संरक्षण प्रयासों में एक गंभीर समस्या का पता चला है। अध्ययनों से पता चलता है कि घोंसलों को गर्म इलाकों में स्थानांतरित करने पर अंडों से निकलने वाले बच्चों की संख्या में कमी देखी जा रही है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में बचे हुए बच्चे भी सामान्य आकार से छोटे होते हैं, जिससे उनकी शारीरिक क्षमता प्रभावित होती है।

तापमान पर होने वाले प्रभाव सबसे चिंताजनक हैं। जब घोंसलों को अधिक गर्म स्थानों पर रखा जाता है, तो निकलने वाले बच्चों का लिंगानुपात बेहद मादा-प्रधान हो जाता है। यह प्रवृत्ति जनसंख्या के प्राकृतिक संतुलन को गड़बड़ा सकती है और दीर्घकालीन संरक्षण प्रयासों को असफल कर सकती है।

छायादार स्थानों पर रखे गए घोंसलों से भी बेहतर परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इन स्थानों पर निकलने वाले बच्चे न केवल छोटे आकार के होते हैं, बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता भी कम होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि घोंसलों का सफल स्थानांतरण केवल तापमान से कहीं अधिक जटिल प्रक्रिया है।

कछुओं की आबादी को बचाने के लिए अब विशेषज्ञ अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की मांग कर रहे हैं। घोंसलों को स्थानांतरित करते समय तापमान, नमी, मिट्टी की गुणवत्ता और अन्य पर्यावरणीय कारकों पर विस्तृत विचार किया जाना चाहिए। इसके बिना कछुओं की प्रजातियों को बचाने के प्रयास विफल हो सकते हैं।