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सेबी ने कॉपथॉल और मंसी पर सेंसेक्स भाव में हेराफेरी का आरोप लगाया
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दोनों संस्थाओं पर सेंसेक्स के समापन मूल्य को प्रभावित करने के लिए आक्रामक ऑर्डर देने और रद्द करने का आरोप लगाया है। इस कार्रवाई से दोनों अपनी डेरिवेटिव स्थितियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास करते थे।
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कॉपथॉल और मंसी नामक दो संस्थाओं पर बाजार में हेराफेरी का गंभीर आरोप लगाया है। सेबी के अनुसार, इन दोनों संस्थाओं ने स्वतंत्र रूप से सेंसेक्स के घटक शेयरों में आक्रामक क्रय-विक्रय आदेश दिए और तत्पश्चात उन्हें रद्द किया ताकि सूचकांक के समापन मूल्य को प्रभावित किया जा सके।
सेबी की जांच से पता चलता है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य डेरिवेटिव बाजार में इन संस्थाओं की स्थिति को लाभदायक बनाना था। आदेशों को रद्द करने की यह रणनीति बाजार में कृत्रिम मांग और आपूर्ति का भ्रम पैदा करती है, जिससे मूल्य निर्धारण प्रक्रिया विकृत होती है।
यह प्रकरण बाजार में पारदर्शिता और निष्पक्ष मूल्य निर्धारण को बनाए रखने के लिए सेबी की निरंतर निगरानी का संकेत है। नियामक प्राधिकरण ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है जो खुदरा निवेशकों के हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इस मामले में आगे की कार्रवाई के संबंध में सेबी की ओर से विस्तृत जानकारी शीघ्र ही सामने आने की संभावना है। यह घटना भारतीय शेयर बाजार में पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं के महत्व को रेखांकित करती है।