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सेबी ने ऋण प्रतिभूतियों के लिए 'क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर' पेश किया
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने ऋण प्रतिभूतियों में जोखिम मापने के लिए नई प्रणाली शुरू की है। यह कदम निजी ऋण जुटाने के नियमों को आसान बनाने के लिए उठाया गया है।
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ऋण प्रतिभूतियों में निवेशकों के जोखिम को बेहतर तरीके से समझने के लिए 'क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर' नामक एक नई प्रणाली की शुरुआत की है। यह उपकरण निवेशकों को विभिन्न ऋण साधनों से जुड़े क्रेडिट जोखिमों का स्पष्ट आकलन करने में मदद करेगा।
इसी साथ, सेबी ने निजी ऋण प्रतिभूतियों के मामले में कुछ महत्वपूर्ण नियमों को आसान किया है। इन परिवर्तनों का उद्देश्य कंपनियों के लिए ऋण जुटाने की प्रक्रिया को सरल और अधिक सुलभ बनाना है। नई नीति से छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों को विशेष रूप से लाभ मिलने की संभावना है।
राष्ट्रीय शेयर बाजार (एनएसई) ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में कुछ असामान्य प्रीमियम के बारे में सचेत किया है। कुछ विदेशी ईटीएफ में बाजार में असंगत रूप से अधिक कीमतें दर्ज की जा रही हैं, जिससे निवेशकों को नुकसान का खतरा हो सकता है। एनएसई की चेतावनी निवेशकों को ऐसे साधनों में निवेश करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देती है।
इन नियामकीय कदमों के माध्यम से सेबी का लक्ष्य भारतीय ऋण बाजार को अधिक पारदर्शी, कुशल और सुरक्षित बनाना है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।