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रीट और इनविट यूनिटों पर डिपोजिटरी रसीदों के नियम जारी किए सेबी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने इन क्षेत्रों में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए डिपोजिटरी रसीदों की विस्तृत नियामक रूपरेखा जारी की है। यह ढांचा विदेशी निवेशकों के लिए रीट और इनविट यूनिटों में निवेश को आसान बनाएगा।
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) यूनिटों पर डिपोजिटरी रसीदों (डीआर) के लिए विस्तृत नियम जारी किए हैं। यह कदम विदेशी पूंजी को इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।
सेबी द्वारा अगस्त में प्रस्तावित इस नियामक ढांचे को सितंबर में अनुमोदित किया गया था। डिपोजिटरी रसीदें विदेशी निवेशकों को भारतीय रीट और इनविट यूनिटों में सीधे निवेश करने का एक वैकल्पिक तरीका प्रदान करती हैं। इससे इन परिसंपत्तियों में वैश्विक निवेश बढ़ने की संभावना है।
यह नई नियामक रूपरेखा विदेशी संस्थागत निवेशकों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए निवेश प्रक्रिया को सरल बनाता है। डिपोजिटरी रसीदें भारतीय प्रतिभूतियों का एक संकर रूप हैं जो विदेशी निवेशकों को स्थानीय विनिमय दर और मुद्रा रूपांतरण संबंधी जटिलताओं से बचाता है।
रीट और इनविट क्षेत्र में इस तरह के विदेशी निवेश से भारत के बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सेबी का यह कदम भारत को एक वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।