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सेबी ने डिजिटल बांड के लिए डेमेट 2.0 पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने वितरित लेजर तकनीक का उपयोग करके टोकनाइज्ड कॉर्पोरेट बांड जारी करने के लिए एक पायलट परियोजना शुरू की है। अब तक तीन कंपनियों ने इस तकनीक के माध्यम से 1,025 करोड़ रुपये मूल्य के बांड जारी किए हैं।
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने वितरित लेजर तकनीक (डीएलटी) का उपयोग करके कॉर्पोरेट बांड को डिजिटलीकृत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। डेमेट 2.0 नामक इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारतीय बांड बाजार में आधुनिक तकनीक को एकीकृत करना है।
अब तक तीन प्रमुख कंपनियों ने इस नई प्रणाली के माध्यम से कुल 1,025 करोड़ रुपये के टोकनाइज्ड बांड जारी किए हैं। ये बांड ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी पर आधारित हैं, जो लेनदेन को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाता है।
यह पायलट प्रोजेक्ट बांड के जारी करने, रखरखाव, व्यापार और निपटान की संपूर्ण प्रक्रिया को डिजिटल प्रारूप में परीक्षण करेगा। इस परीक्षण के माध्यम से सेबी यह मूल्यांकन करेगा कि क्या डीएलटी तकनीक भारतीय पूंजी बाजार में व्यापक रूप से लागू की जा सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल भारतीय बांड बाजार को आधुनिकीकरण करने और निवेशकों के लिए बेहतर सुविधा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। डिजिटलीकरण से बांड बाजार में दक्षता बढ़ने और लेनदेन की लागत में कमी आने की उम्मीद है।