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सेबी ने शोध विश्लेषकों के लिए कॉल रिकॉर्डिंग अनिवार्यता में ढील दी
बाजार नियामक सेबी ने शोध विश्लेषकों पर कॉल रिकॉर्डिंग अनिवार्य रखने की अपनी पहली शर्त को हटाया है। यह कदम अनुपालन बोझ को कम करने और व्यावसायिक सुगमता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को एक परिपत्र जारी कर शोध विश्लेषकों और संस्थाओं के लिए संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग अनिवार्य रखने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया। यह निर्णय नियामक अनुपालन को सरल बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, शोध विश्लेषकों को सभी ग्राहकों, जिनमें संभावित ग्राहक भी शामिल हैं, के साथ अपनी बातचीत का विवरण विभिन्न माध्यमों से रखना जारी रखना होगा। इनमें हस्ताक्षरित भौतिक रिकॉर्ड, ईमेल, एसएमएस संदेश, कॉल रिकॉर्डिंग या किसी अन्य कानूनी रूप से सत्यापनीय तरीका शामिल हो सकते हैं।
सेबी के दिशानिर्देश के अनुसार, ये रिकॉर्ड कम से कम पांच वर्षों तक बनाए रखने अनिवार्य हैं। यदि किसी विवाद का मामला सामने आता है, तो संबंधित रिकॉर्ड को विवाद के समाधान तक संरक्षित रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, यदि सेबी किसी विशेष रिकॉर्ड को संरक्षित रखने का निर्देश देता है, तो उसे तब तक बनाए रखना होगा।
यह संशोधन उद्योग की ओर से दिए गए सुझावों के आधार पर किया गया है, जहां अनुपालन लागत और प्रशासनिक बोझ को कम करने की मांग की जा रही थी। नियामक ने स्पष्ट किया है कि कॉल रिकॉर्डिंग अब अनिवार्य नहीं है, लेकिन दस्तावेजीकरण की कुल आवश्यकता बरकरार है।