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सेबी ने डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान को डिफॉल्ट विकल्प बनाया
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने फंड हाउसों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान को डिफॉल्ट विकल्प बना दिया है। यह कदम निवेशकों के लिए कम लागत का विकल्प लाता है, लेकिन निवेशकों को कम शुल्क और सलाह सेवाओं के बीच संतुलन करना होगा।
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सेबी के इस निर्णय से म्यूचुअल फंड निवेश में लागत का मुद्दा केंद्र में आ गया है। डायरेक्ट प्लान में वितरकों के कमीशन नहीं होते, जिससे निवेशकों को कम व्यय अनुपात (एक्सपेंस रेशियो) का लाभ मिलता है। इसका सीधा मतलब यह है कि निवेशकों का अधिक हिस्सा वास्तविक निवेश में लगता है।
हालांकि, डायरेक्ट प्लान चुनने का मतलब यह भी है कि निवेशकों को निवेश सलाह और पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाएं नहीं मिलेंगी। नियमित प्लान में वितरक द्वारा दी जाने वाली ये सेवाएं महत्वपूर्ण होती हैं, खासकर नए निवेशकों के लिए। सेबी का यह कदम निवेशकों को स्वयं निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।
वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि अनुभवी निवेशकों के लिए डायरेक्ट प्लान ज्यादा लाभदायक हो सकते हैं क्योंकि उन्हें बाहरी सलाह की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन साधारण निवेशकों के लिए सलाह सेवाएं मूल्यवान साबित हो सकती हैं, भले ही इसमें अतिरिक्त खर्च हो।
इस नीति परिवर्तन से डिजिटल निवेश में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों को बेहतर विकल्प मिलेंगे। हालांकि, निवेशकों को अपनी वित्तीय क्षमता और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।