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विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर में छूट का समर्थन
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह निर्णय भारतीय बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य रखता है।
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर को समाप्त करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। यह कदम भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर उन लाभों पर लगाया जाता है जो निवेशकों को दीर्घकालीन होल्डिंग अवधि के बाद प्रतिभूतियों को बेचने से प्राप्त होते हैं। भारत में, दीर्घकालीन के रूप में वर्गीकृत होने के लिए निवेश को आमतौर पर 12 महीने या उससे अधिक समय के लिए रखना पड़ता है। यह कर विदेशी निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित करता है और बाजार में उनकी भागीदारी को कम आकर्षक बनाता है।
सेबी का यह समर्थन एफपीआई के लिए भारतीय पूंजी बाजारों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य रखता है। इस प्रस्ताव से भारत को विश्व स्तर पर निवेश गंतव्य के रूप में अधिक आकर्षणीय बनाने में मदद मिल सकती है। दीर्घकालीन निवेश को प्रोत्साहित करने से बाजार में स्थिरता भी बढ़ने की संभावना है।
इस प्रस्ताव के कार्यान्वयन के लिए सरकार के अनुमोदन की आवश्यकता है। यदि यह लागू हो जाता है, तो यह भारतीय वित्तीय बाजारों के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और विदेशी निवेशकों को दीर्घकालीन निवेश के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।