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लिंगायत-वीरशैव पहचान को लेकर हिंदुओं को बांटने का प्रयास खतरनाक: संत
कर्नाटक में एक सम्मेलन में एक प्रमुख संत ने कहा कि बसवेश्वर की प्रगतिशील विरासत का दावा करने वाले कुछ लोग हिंदू परंपराओं का विरोध करते हैं, लेकिन उसी समाज की संस्थाओं से लाभ और मान्यता स्वीकार करते हैं।
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कर्नाटक में आयोजित एक धार्मिक सम्मेलन में एक वरिष्ठ संत ने लिंगायत और वीरशैव समुदायों के बीच विभाजन की कोशिशों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संत ने कहा कि ऐसी विभाजनकारी नीति हिंदू समाज के लिए हानिकारक है और धार्मिक एकता को कमजोर करती है।
संत के अनुसार, बसवेश्वर की प्रगतिशील विचारधारा को आगे बढ़ाने का दावा करने वाले कुछ लोग वास्तव में हिंदू परंपराओं का विरोध करते हैं। हालांकि, ये ही व्यक्ति हिंदू समाज से जुड़ी संस्थाओं से पद, मान्यता और अन्य सुविधाएं प्राप्त करते हैं। यह विरोधाभास उनकी नीयत पर सवाल उठाता है।
संत ने कहा कि बसवेश्वर की शिक्षाएं सामाजिक समरसता और भाईचारे पर आधारित थीं, न कि समुदायों को बांटने पर। उन्होंने आह्वान किया कि लिंगायत और वीरशैव समुदायों को अपनी साझा विरासत को समझना चाहिए और कृत्रिम विभाजन से सावधान रहना चाहिए।
सम्मेलन में संत की इस टिप्पणी को धार्मिक समुदायों के बीच एकता बनाए रखने का आह्वान माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी धार्मिक-सांस्कृतिक बहसें समाज में सद्भावना और पारस्परिक सम्मान को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।