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सितंबर की बारिश खरीफ फसलों के भाग्य का फैसला करेगी
खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर के करीब आ गई है, लेकिन 13 प्रतिशत की वर्षा की कमी के बीच आने वाले चार हफ्तों की बारिश मौसम की सफलता के लिए अहम साबित होगी।
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खरीफ सीजन के लिए देश भर में बुवाई का काम पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 1.5 प्रतिशत पीछे रह गया है। हालांकि, इस आशाजनक संकेत के बावजूद, मानसून की कमजोर कार्यप्रणाली ने कृषि क्षेत्र में चिंता का माहौल बना दिया है। अब तक 13 प्रतिशत की वर्षा में कमी दर्ज की गई है, जो खरीफ फसलों की पैदावार को लेकर संकेत दे रही है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगले चार सप्ताहों में वर्षा का पैटर्न इस मौसम का भाग्य तय करेगा। सितंबर के महीने में आने वाली बारिश मिट्टी की नमी को बनाए रखने और पौधों की बढ़वार के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। मौजूदा समय में धान, मक्का और दलहन सहित प्रमुख खरीफ फसलें वर्षा पर निर्भर हैं।
मानसून के कमजोर प्रदर्शन के कारण किसान चिंतित हैं कि सूखे की स्थिति में उनकी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों पर नजर रखी जा रही है। बुवाई के आंकड़े सकारात्मक हैं, पर वर्षा की कमी को पूरा करने के लिए सितंबर में पर्याप्त और समय पर बारिश की जरूरत है।
कृषि मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां पिछली बारिश की जानकारी के आधार पर आने वाले हफ्तों की निगरानी कर रही हैं। खरीफ सीजन के अंतिम चरण में मौसम के व्यवहार से ही फसल उत्पादन का वास्तविक अनुमान लगाया जा सकेगा।