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तेलंगाना की करेगुट्टालु पहाड़ियों में सात परिवार: भय से मुक्ति की कहानी

तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित करेगुट्टालु पहाड़ियों में अब केवल सात परिवार रहते हैं जो दशकों के भय से मुक्त हो रहे हैं। माओवादियों के पूर्व गढ़ इन इलाकों में अब सड़कें, सुरक्षा ढांचा और विकास की योजनाएं आ रही हैं।

LSN India · 28 August 2026

तेलंगाना की करेगुट्टालु पहाड़ियों में सात परिवार: भय से मुक्ति की कहानी

तेलंगाना की करेगुट्टालु पहाड़ियों में जीवन की रफ्तार बदल रही है। माओवादी संघर्ष और पुलिस कार्रवाई के बीच दशकों तक फंसे इस क्षेत्र के सात परिवार अब नई उम्मीद देख रहे हैं। एक समय जहां ये पहाड़ियां माओवादियों का मजबूत अड्डा थीं, वहां अब राज्य का प्रशासन पुनः अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

राज्य सरकार इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास कर रही है। सड़कें बन रही हैं, सुरक्षा के नए उपाय किए जा रहे हैं और बिजली तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की घोषणाएं हो रही हैं। स्थानीय निवासियों के लिए यह विकास दीर्घकालीन भय से मुक्ति का प्रतीक बन गया है जो वे माओवादी गतिविधियों के कारण झेल रहे थे।

हालांकि, राज्य की बढ़ती मौजूदगी कुछ नई चुनौतियां भी ला रही है। इन पहाड़ियों के जंगलों और उन समुदायों का भविष्य अब अनिश्चित है जो यहां कई दशकों से रह रहे हैं। विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अब एक महत्वपूर्ण प्रश्न बन गया है। स्थानीय समुदायों की परंपरागत जीवनशैली और नई विकास योजनाओं के बीच समन्वय ही इन पहाड़ियों का असली विकास तय करेगा।