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भारत में विदेशी निवेश का असमान वितरण: सात राज्यों का 82% हिस्सा
भारत में आर्थिक सुधारों के बाद भी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश मुख्यतः कुछ ही राज्यों में केंद्रित है। जनवरी 2000 से मार्च 2026 तक आने वाले कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग 82 प्रतिशत केवल सात राज्यों में निवेश हुआ है।
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भारत में आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के बावजूद विदेशी पूंजी का वितरण अत्यंत असमान रहा है। पिछले 26 सालों में देश में जो विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आया है, उसका अधिकांश हिस्सा महज सात राज्यों तक सीमित रहा है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि आर्थिक सुधारों के लाभ देश के सभी हिस्सों में समान रूप से नहीं पहुंचे हैं।
यह स्थिति अर्थव्यवस्था के क्षेत्रीय असंतुलन को उजागर करती है। विकसित बुनियादी ढांचा, कुशल कार्यबल और बेहतर नीतिगत वातावरण वाले राज्यों ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। वहीं, अन्य राज्यों में निवेश आकर्षित करने के लिए आवश्यक शर्तें अभी भी अधूरी हैं।
एफडीआई के इस केंद्रीकरण से क्षेत्रीय विकास में गंभीर चुनौतियां खड़ी हुई हैं। देश के कम विकसित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं और औद्योगिक विकास गति से नहीं बढ़ा है। इससे क्षेत्रीय अंतर और भी बढ़ गया है।
इस समस्या का समाधान करने के लिए राज्यों को अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ानी होगी। बेहतर बिजली आपूर्ति, परिवहन व्यवस्था और कर नीतियों में सुधार के माध्यम से छोटे राज्य भी विदेशी निवेश आकर्षित कर सकते हैं। केंद्रीय सरकार को भी क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।