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सिमिलिपाल के इको-सेंसिटिव जोन की अधिसूचना 7 साल से लंबित
केंद्र सरकार ओडिशा सरकार को विलंब का जिम्मेदार ठहरा रही है। इको-सेंसिटिव जोन संरक्षित क्षेत्र के 10 किमी के बफर जोन होते हैं जहां व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध होता है।
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सिमिलिपाल राष्ट्रीय उद्यान के लिए इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) की अधिसूचना को सात वर्ष से अधिक समय हो गया है, फिर भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस विलंब के लिए ओडिशा सरकार को दायित्वहीन बताया है। ईएसजेड सुरक्षित क्षेत्र के बाहर 10 किलोमीटर तक फैले बफर जोन होते हैं, जहां खनन, वनोन्मूलन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध लागू होते हैं।
यह अधिसूचना पर्यावरणीय संरक्षण के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ईएसजेड की स्थापना से राष्ट्रीय उद्यान और इसके आसपास के वनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। सिमिलिपाल, जो बाघ अभयारण्य के रूप में भी जाना जाता है, इस क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण के लिए आवश्यक है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस प्रशासनिक विलंब पर चिंता व्यक्त की है। ईएसजेड की मंजूरी के बिना, संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर अनियंत्रित विकास और वाणिज्यिक गतिविधियां जारी रह सकती हैं, जिससे वन्यजीवन और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान हो सकता है। विलंब की परिस्थितियों में जल्द समाधान की आवश्यकता है।