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शरद पूर्णिमा 2026: पंचक-भद्रा में खीर रखने का शुभ समय
शरद पूर्णिमा 2026 पर खगोलीय घटनाओं और शुभ मुहूर्त की जानकारी देशभर के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार पंचक और भद्रा काल का ध्यान रखना आवश्यक है।
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शरद पूर्णिमा हिंदू पंचांग में सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक मानी जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। 2026 की शरद पूर्णिमा पर भक्तों को पंचक और भद्रा काल के समय की सटीक जानकारी रखनी चाहिए ताकि वे शुभ मुहूर्त में पूजा और अन्य धार्मिक कार्य कर सकें।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि को चांदनी में खीर रखने की परंपरा बेहद पवित्र मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा की किरणें विशेष औषधीय गुणों से युक्त होती हैं। खीर को रात भर चांदनी में रखने के बाद सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसके लिए चंद्रोदय का समय जानना अत्यंत आवश्यक है।
ज्योतिष विशेषज्ञों के मुताबिक शरद पूर्णिमा पर भद्रा काल को अशुभ माना जाता है। इसी तरह पंचक नक्षत्र की अवधि में भी कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। इन दोनों काल को छोड़कर ही मुख्य पूजा और खीर रखने का कार्य संपन्न करना चाहिए।
मां लक्ष्मी की पूजा शरद पूर्णिमा की रात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी समुद्र से निकली थीं। घर में समृद्धि और सुख-शांति लाने के लिए भक्त विभिन्न पूजा विधियों का पालन करते हैं। शरद पूर्णिमा पर किए गए धार्मिक कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है।