LSN News › India

World · India Bureau

केरल के जहाज़ के डूबने से समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या

मई 2025 की दुर्घटना के बाद तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने समुद्री पारिस्थितिकी पर प्रभाव का अध्ययन शुरू किया है। अनुसंधान संस्थान दो साल तक प्रदूषण के दीर्घकालीन प्रभावों की निगरानी करेगा।

LSN India · 15 September 2026

केरल के जहाज़ के डूबने से समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या

तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) ने मई 2025 में केरल के पास हुई जहाज़ की दुर्घटना के पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए व्यापक अध्ययन शुरू किया है। दुर्घटना से समुद्र में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कणों का रिसाव हुआ है, जिसे नर्डल प्रदूषण के नाम से जाना जाता है।

तूतीकोरिन स्थित सुगंधी देवदासन समुद्री अनुसंधान संस्थान (एसडीएमआरआई) को इस अध्ययन का नेतृत्व सौंपा गया है। संस्थान द्वारा दुर्घटना के तुरंत बाद अल्पकालीन प्रभाव मूल्यांकन किया गया और अब दो वर्षीय दीर्घकालीन अध्ययन चल रहा है।

अनुसंधान से पता चल रहा है कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इस प्रदूषण का निरंतर असर बना हुआ है। समुद्री जीवन और तटीय क्षेत्रों पर प्लास्टिक कणों का दीर्घकालीन प्रभाव समझने के लिए यह अध्ययन महत्वपूर्ण है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से समुद्री प्रदूषण की गंभीरता को समझा जा सकता है और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर नीतियां बनाई जा सकती हैं। टीएनपीसीबी की ओर से समुद्री संरक्षण के लिए और सख्त उपाय लागू करने की बात कही जा रही है।