World · India Bureau
160 साल पहले जली जहाज़ की बर्बादी को मैंग्रोव ने जीवंत द्वीप में बदला
समुद्र में डूबे एक पुराने जहाज़ को मैंग्रोव के पेड़ों ने धीरे-धीरे अपने में समाहित कर एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है। यह प्रकृति के पुनर्जीवन का एक अनोखा उदाहरण बन गया है।
LSN India ·

दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के तटीय क्षेत्रों में एक असाधारण घटना सामने आई है जहां करीब 160 साल पहले एक जहाज़ आग लगने से नष्ट हो गया था। समय के साथ समुद्र में डूबे इस जहाज़ के मलबे के चारों ओर मैंग्रोव के पेड़ों ने एक विशाल पारिस्थितिकी तंत्र का विकास किया है।
जहाज़ के मलबे के ऊपर बढ़ने वाले मैंग्रोव के पेड़ों की जटिल जड़ें इस बर्बाद संरचना को पूरी तरह आवृत कर गई हैं। समुद्र के खारे जल में भी ये पेड़ उत्पन्न हुए और अब इस क्षेत्र को एक सजीव द्वीप में परिणत कर दिया है। मैंग्रोव की घनी वनस्पति ने एक पूर्ण जलीय वातावरण तैयार किया है।
इस स्थान के चारों ओर अब विविध जलीय जीव-जंतु और पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। मैंग्रोव जंगल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये मछलियों के प्रजनन स्थल और अन्य जलीय प्रजातियों के आश्रय स्थल का काम करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना प्रकृति की पुनर्स्थापना क्षमता का एक जीवंत प्रमाण है। मानव-निर्मित मलबे को पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल करके मैंग्रोव ने दिखाया है कि कैसे प्रकृति अपने पुनर्जीवन के माध्यम से बर्बादी को नया जीवन प्रदान कर सकती है।