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शिव तांडव का सिनेमाई सफर: 1958 से 2026 तक की यात्रा

सत्तर साल के अंतराल में शिव तांडव की कथा कई बार परदे पर आई है। नई रामायण में यश का रावण पात्र अरविंद त्रिवेदी की विरासत को आगे ले जाने का प्रयास करेगा।

LSN India · 22 October 2026

शिव तांडव का सिनेमाई सफर: 1958 से 2026 तक की यात्रा

भारतीय सिनेमा में धार्मिक महाकाव्यों का चित्रण सदा से दर्शकों को आकर्षित करता रहा है। शिव तांडव की अवधारणा भी इसी परंपरा का हिस्सा रही है, जो 1958 के 'भूकैलास' से लेकर वर्तमान काल तक विभिन्न रूपों में प्रस्तुत हुई है।

1988 में रामानंद सागर द्वारा निर्मित 'रामायण' सीरीज ने दूरदर्शन पर एक युगांतकारी प्रभाव डाला था। इस धारावाहिक में अरविंद त्रिवेदी का रावण चरित्र इतना प्रभावशाली रहा कि वह दशकों तक दर्शकों की स्मृति में बना रहा। त्रिवेदी की कलात्मक प्रस्तुति ने रावण को न केवल एक खलनायक के रूप में, बल्कि एक जटिल चरित्र के रूप में दिखाया।

2026 में आने वाली नई रामायण परियोजना में अभिनेता यश का रावण चरित्र दर्शकों के समक्ষ एक नया दृष्टिकोण लेकर आएगा। यह निर्माण पारंपरिक कथा को समकालीन दृश्य-श्रव्य तकनीकों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करेगा।

धार्मिक महाकाव्यों के पुनर्निर्माण में सफलता केवल तकनीकी उत्कृष्टता पर ही नहीं, बल्कि पात्रों की संवेदनशील व्याख्या पर भी निर्भर करती है। इस दृष्टि से यश की प्रस्तुति दर्शकों और आलोचकों दोनों के लिए आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकती है।