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कपिल सिब्बल ने पार्टी बदलने वाले राजनेताओं के लिए 10 साल के प्रतिबंध की मांग की
वरिष्ठ राजनेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि अपने कार्यकाल के दौरान दल बदलने वाले विधायक नागरिकों और पार्टी दोनों के प्रति अपनी जवाबदेही को कमजोर करते हैं। उन्होंने इस प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए एक दशक लंबा प्रतिबंध लागू करने का सुझाव दिया है।
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कपिल सिब्बल ने राजनीतिक अस्थिरता के एक बड़े कारण के रूप में विधायकों द्वारा मध्यकाल में दल परिवर्तन की समस्या को चिन्हित किया है। उनके अनुसार, यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों को नुकसान पहुंचाती है और जनता के साथ किए गए वादों को तोड़ती है।
सिब्बल का मानना है कि जब कोई निर्वाचित प्रतिनिधि चुनाव के बाद अपनी पार्टी बदल देता है, तो वह उन मतदाताओं को धोखा देता है जिन्होंने विशेष दल के चिह्न पर उसे वोट दिया था। इससे नागरिकों के विश्वास में कमी आती है और संसदीय संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
पार्टी आंतरिक स्तर पर भी कमजोर पड़ती है जब सदस्य अपने दल को छोड़कर अन्य जगह चले जाते हैं। इससे राजनीतिक संगठनों की स्थिरता कम होती है और उनकी नीति निर्माण क्षमता प्रभावित होती है।
सिब्बल द्वारा प्रस्तावित 10 साल का प्रतिबंध इस समस्या से निपटने का एक व्यावहारिक तरीका माना जा रहा है। यह प्रस्ताव दलबदल की संस्कृति को हतोत्साहित करने और राजनेताओं को उनके प्रारंभिक चुनाव प्रतिश्रुतियों के प्रति जवाबदेह रखने का उद्देश्य रखता है।