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कोचीन की बाढ़ की कहानी चुप्पी में बयां करती है 'नानवु' कॉमिक
चित्रकार अथुल्या पिल्लै की मूक कॉमिक सीरीज़ 'नानवु' एक बालिका के जीवन के माध्यम से ज्वारीय बाढ़ की त्रासदी को दर्शाती है। शब्दों के बिना सिर्फ चित्रों से कहानी कहने वाली यह कृति जलवायु संकट की वास्तविकताओं को उजागर करती है।
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भारतीय चित्रकार अथुल्या पिल्लै ने एक अनूठी मूक कॉमिक 'नानवु' के माध्यम से केरल के कोचीन शहर में आने वाली ज्वारीय बाढ़ की दर्दनाक कथा प्रस्तुत की है। यह कॉमिक किसी भी संवाद या पाठ के बिना केवल दृश्य माध्यम से एक छोटी लड़की के संघर्षपूर्ण जीवन को दर्शाती है, जो अपने शहर में बढ़ते जलस्तर से जूझ रही है।
चुप्पी में कही गई यह कहानी दर्शकों को बिना किसी शब्द के गहरे भावनात्मक स्तर पर छूती है। पिल्लै की कलात्मक अभिव्यक्ति जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण आम जनता, विशेषकर बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों को सशक्त तरीके से प्रस्तुत करती है।
'नानवु' कॉमिक केवल एक कलाकृति नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय संकट के प्रति जागरूकता फैलाने का एक माध्यम है। यह कार्य भारत के तटीय क्षेत्रों में बढ़ती बाढ़ की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करता है और पाठकों को सामाजिक दायित्व की याद दिलाता है।
पिल्लै का यह प्रयास साबित करता है कि कला के माध्यम से जटिल सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को कितनी प्रभावशाली तरीके से समझाया जा सकता है। 'नानवु' न केवल भारतीय पाठकों बल्कि विश्वव्यापी दर्शकों को जलवायु संकट की वैश्विक प्रकृति को समझने में मदद करता है।