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95 वर्षीय सिंगीथम श्रीनिवास राव: कहानी कहने के कला के अग्रदूत
दिग्गज फिल्ममेकर सिंगीथम श्रीनिवास राव ने दशकों तक विभिन्न भाषाओं, शैलियों और माध्यमों में कथानक निर्माण की संभावनाओं को खोजा है। 95 की उम्र में भी वे सिनेमा के प्रति अपनी जिज्ञासा बनाए हुए हैं।
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सिंगीथम श्रीनिवास राव का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लेखक और फिल्ममेकर के रूप में उनका विस्तृत कैरियर कहानी कहने की कला में निरंतर प्रयोग और नवाचार का प्रमाण है। उन्होंने अपने लंबे पेशेवर जीवन में फिल्म निर्माण के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझा और विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है।
राव ने अपने कार्यकाल में विविध भाषाओं और विभिन्न शैलियों में कथानक विकास पर कार्य किया है। फिल्म निर्माण के विभिन्न माध्यमों और रूपों को समझने की उनकी प्रवृत्ति ने उन्हें एक बहुमुखी रचनाकार के रूप में स्थापित किया है। उनका दृष्टिकोण सदा ही नई संभावनाओं की खोज में लगा रहा है।
निरानबे वर्ष की आयु में भी सिंगीथम श्रीनिवास राव सिनेमा की दुनिया से जुड़े प्रश्नों में समान रूप से रुचि दिखाते हैं। उनकी जिज्ञासा और सीखने की इच्छा उन्हें सिनेमाई जगत में एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाती है। उनके अनुभव और दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करते हैं।