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इस्पात अतिरिक्त क्षमता पर वैश्विक कार्रवाई की मांग की सीतारमण ने
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस्पात क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए एकतरफा शुल्कों के बजाय बहुपक्षीय अनुशासन की वकालत की है। भारत की बढ़ती इस्पात मांग को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सुधारों की जरूरत पर जोर दिया है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक इस्पात उद्योग की अतिरिक्त क्षमता समस्या से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया है। सीतारमण का मानना है कि विभिन्न देशों द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा शुल्क केवल अधिशेष इस्पात को एक बाजार से दूसरे बाजार में स्थानांतरित करते हैं, जिससे मूल समस्या का समाधान नहीं होता है।
वित्त मंत्री का मत है कि इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए सभी देशों को मिलकर सब्सिडी पर बहुपक्षीय अनुशासन स्थापित करना चाहिए। उन्होंने इस्पात उद्योग के अंतर्राष्ट्रीय संगठन को भी इस प्रक्रिया में भाग लेने का आमंत्रण दिया है। सीतारमण का तर्क है कि वास्तविक सुधार तभी संभव है जब सभी प्रमुख उत्पादक देश एक साझा ढांचे के तहत काम करें।
भारत के संदर्भ में, सीतारमण ने देश की तीव्र आर्थिक वृद्धि और बढ़ती बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण इस्पात की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला है। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक इस्पात बाजार में स्थिरता भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है जहां इस कच्चे माल की भारी मांग है। सीतारमण की इस पहल का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के हितों को आगे बढ़ाना है।