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60 साल का अध्ययन: खेत को अकेला छोड़ने से बना संपूर्ण वन
ब्रिटिश वैज्ञानिकों के छह दशक के अध्ययन से पता चला है कि निष्क्रिय पुनर्वनीकरण प्राकृतिक वनों के विकास में अत्यंत प्रभावी है। यह पद्धति न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि आर्थिक रूप से भी सस्ती है।
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1961 में ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक 4 हेक्टेयर जौ के खेत की खेती बंद कर दी और इसे प्रकृति के भरोसे छोड़ दिया। 60 वर्षों बाद इस क्षेत्र का रूपांतरण एक घनी प्राकृतिक वनभूमि में हो गया है। यह दीर्घकालीन अध्ययन वन पुनरुद्धार के लिए एक सस्ती और प्रभावी रणनीति का प्रमाण है।
इस परियोजना में देखा गया कि कांटेदार झाड़ियों की सुरक्षात्मक परत ने कम उम्र के पेड़ों को शाकाहारी जानवरों से बचाया। साथ ही, हवा और जैसे पक्षियों के माध्यम से बीज स्वाभाविक रूप से फैल गए, जिससे वन की विविध संरचना का विकास हुआ।
पचास वर्षों के बाद, यह क्षेत्र प्राचीन वनों की विशेषताओं को प्रदर्शित करने लगा। शोधकर्ताओं के अनुसार, निष्क्रिय पुनर्वनीकरण दृष्टिकोण वनभूमि को बहाल करने के लिए एक व्यावहारिक विकल्प साबित हुआ है। यह अध्ययन दर्शाता है कि प्रकृति को अपने तरीके से काम करने देने से ही सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।