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जवाधु पहाड़ियों में अवैध खेती को लेकर छह वन अधिकारी निलंबित
तमिलनाडु के जवाधु पहाड़ियों में वन अधिकारियों ने आदिवासियों को हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में अवैध खेती की अनुमति दी। जांच में रिश्वतखोरी और वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन का पता चला है।
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जवाधु पहाड़ियों में अवैध कृषि गतिविधियों को लेकर प्रशासन ने छह वन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर रिश्वत लेकर आदिवासियों को वन संरक्षित क्षेत्रों में हजार एकड़ से अधिक भूमि पर खेती करने की अनुमति देने का आरोप है। अनुसंधान से पता चला है कि इस अवैध गतिविधि में 600 से 700 आदिवासी शामिल हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, निलंबित अधिकारियों ने वन अधिकार अधिनियम 2006 का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए किसानों को जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज प्रदान करने का वादा किया था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आदिवासियों ने वन भूमि पर अनाधिकृत रूप से खेती शुरू कर दी थी।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला संगठित तरीके से किया जा रहा था और इसमें स्थानीय प्रशासन के कई स्तरों की सांठ-गांठ थी। जवाधु पहाड़ियों की पारिस्थितिकी संरक्षण के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती हैं, जहां केवल अधिकृत क्षेत्रों में ही कृषि की अनुमति दी जाती है।
सूत्रों के अनुसार, आदिवासियों को भूमि के दस्तावेज देने का लालच दिखाकर उन्हें इस अवैध कार्य में शामिल किया गया था। प्रशासन अब इस मामले में शामिल अन्य अधिकारियों की पहचान करने के लिए गहन जांच चला रहा है।