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नवरात्र षष्ठी पर मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि और महत्व
नवरात्र के छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा की परंपरा है। देवी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री माना जाता है और उनके चार भुज शक्ति के प्रतीक हैं।
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नवरात्र पर्व के छठे दिन को षष्ठी तिथि कहा जाता है। इस दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है, जो देवी दुर्गा का छठा रूप माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मां कात्यायनी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी का दर्जा प्राप्त है।
देवी कात्यायनी की मूर्ति चार भुजाओं वाली दर्शाई जाती है। उनके हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और कमल पुष्प शोभायमान होते हैं। देवी का वाहन सिंह को माना गया है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है।
नवरात्र के इस दिन भक्तजन माता की प्रतिमा पर फूल, धूप, दीप और भोग अर्पित करते हैं। पूजा के समय मां को लाल रंग के फूल और मिठास से युक्त प्रसाद अर्पित किया जाता है। षष्ठी तिथि को भक्तों के लिए विशेष महत्व माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी की आराधना से भक्तों का मनोबल बढ़ता है और बुराई पर अच्छाई की विजय होती है। घरों में पूजा-पाठ के दौran परिवार के सभी सदस्य माता की आरती में सम्मिलित होते हैं।