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लॉक-इन अवधि के बाद भी एंकर निवेशक फंड में बने रहे, लंबी अवधि की रणनीति अपना रहे हैं
स्मॉलकैप फंड अपने एंकर निवेशों को लॉक-इन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी बनाए रख रहे हैं। शक्तिशाली निवेश प्रवाह से संपत्ति में वृद्धि होते हुए ये फंड चुनिंदा कंपनियों में दीर्घकालीन दांव लगा रहे हैं।
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भारतीय पूंजी बाजार में एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति उभरी है जहां स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के दौरान अपनी एंकर निवेश स्थिति को दीर्घकाल के लिए बनाए रखने का फैसला कर रहे हैं। सेबी के एक अध्ययन द्वारा समर्थित इस रणनीति से संकेत मिलता है कि ये निवेशक अपने चुने हुए कंपनियों में मजबूत विश्वास रखते हैं।
लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद भी फंड अपनी होल्डिंग्स को बनाए रखने का मुख्य कारण मजबूत निवेश प्रवाह है। इससे इन फंडों की कुल परिसंपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे उन्हें अपने निवेश लक्ष्यों को पूरा करने में बेहतर नमनीयता मिल रही है।
नियामक अध्ययन से पता चलता है कि यह प्रवृत्ति 2026 में जारी रहने की उम्मीद है। फंड प्रबंधक केवल तत्काल लाभ के बजाय चुनिंदा कंपनियों की दीर्घकालीन वृद्धि क्षमता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह दृष्टिकोण सूचकांक आधारित निवेश से परे स्मॉलकैप सेगमेंट में आस्था को प्रदर्शित करता है। भारतीय पूंजी बाजार में यह विकास निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है क्योंकि यह अनुभवी निवेश कक्ष द्वारा मजबूत विश्लेषण और चयन प्रक्रिया को दर्शाता है।