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कॉर्नेल के वैज्ञानिकों ने विकसित किए रंग बदलने वाले टमाटर
अमेरिकी शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक के जरिए ऐसे टमाटर विकसित किए हैं जो नाइट्रोजन की कमी का संकेत देने के लिए अपने रंग में परिवर्तन करते हैं। यह आविष्कार कृषि में पोषक तत्वों के प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
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कॉर्नेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक अभिनव समाधान विकसित किया है जो कृषकों को फसल की पोषक स्थिति की तुरंत जानकारी देगा। इस अध्ययन में टमाटर को ऐसी प्रणाली से लैस किया गया है कि जब पौधे को नाइट्रोजन की कमी का सामना करना पड़े, तो फल का रंग बदल जाता है।
नाइट्रोजन कृषि में सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक है। परंतु किसान अक्सर इसकी मात्रा का सही अनुमान नहीं लगा पाते हैं, जिससे अधिक उर्वरक का प्रयोग होता है। इससे न केवल उत्पादन लागत बढ़ती है, बल्कि पर्यावरणीय समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं।
यह रंग-परिवर्तनशील टमाटर तकनीक किसानों को सटीक कृषि प्रणालियों में मदद कर सकती है। पौधों का रंग परिवर्तन एक जैविक संकेत प्रदान करता है कि कब और कितनी नाइट्रोजन का समायोजन आवश्यक है।
इस तकनीक के व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए और शोध जारी है। यदि यह वाणिज्यिक स्तर पर सफल होता है, तो यह खाद्य उत्पादन, कृषि-अर्थशास्त्र और पर्यावरण संरक्षण तीनों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।