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मिट्टी परीक्षण से बढ़ेगी फसल की पैदावार, जानिए सरकारी योजना
खेत में अधिक उर्वरक डालने से हमेशा बेहतर उत्पादन नहीं मिलता। मिट्टी में पोषक तत्वों के असंतुलन से किसानों का खर्च बढ़ता रहता है, जबकि फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। सरकार की सॉइल हेल्थ कार्ड योजना इस समस्या का समाधान प्रदान करती है।
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देश के किसानों के लिए मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड योजना कृषि उत्पादकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो रही है। इस योजना के तहत मिट्टी की विस्तृत जांच से किसान यह जान सकते हैं कि उनकी खेत में किन पोषक तत्वों की कमी है और कौन से उर्वरकों की आवश्यकता है।
आमतौर पर किसान अनुमान के आधार पर अधिक मात्रा में खाद और यूरिया का इस्तेमाल करते हैं, जिससे न केवल खेती की लागत में वृद्धि होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि संतुलित खाद का उपयोग करने से फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है और उत्पादन भी बेहतर होता है।
सॉइल हेल्थ कार्ड योजना के अंतर्गत प्रत्येक खेत की मिट्टी का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। इस कार्ड में मिट्टी की अम्लीयता, क्षारीयता, जैविक कार्बन और विभिन्न सूक्ष्म तत्वों की जानकारी दी जाती है। इसके आधार पर किसान अपनी खेती की रणनीति तैयार कर सकते हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह योजना किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण के संरक्षण दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मिट्टी के सही ज्ञान से किसान अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं और अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।