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सोलर पैनलों के नीचे केसर की खेती से आय दोगुनी, कोलोराडो में सफलता
कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध में पता चला है कि सौर पैनलों की छाया में केसर की पैदावार दोगुनी हो सकती है। शहरी खेती और नवीकरणीय ऊर्जा का संयोजन भारत में भी जमीन की कमी को हल करने का नया रास्ता दिखाता है।
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अमेरिका के कोलोराडो में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि दुनिया के सबसे महंगे मसाले केसर की खेती सोलर पैनलों के नीचे करने से आश्चर्यजनक नतीजे मिल रहे हैं। इस विधि से न केवल पैदावार दोगुनी हुई है, बल्कि इससे पांच साल में 60,000 डॉलर की शुद्ध आय की संभावना दिख रही है।
कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है कि सोलर पैनलों द्वारा प्रदान की जाने वाली आंशिक छाया केसर की खेती के लिए आदर्श है। यह अनोखा कृषि मॉडल शहरी क्षेत्रों की छतों पर खेती करने का एक कुशल तरीका प्रदान करता है, जहां जमीन की कमी एक प्रमुख समस्या है। सोलर पैनलों के नीचे उगाई गई केसर पारंपरिक विधि से उगाई गई फसल की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
इस कृषि पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान एक ही जगह से दो आय के स्रोत प्राप्त कर सकते हैं - बिजली उत्पादन और केसर की बिक्री। ऐसा अनुमान है कि पांच वर्षों में इस परियोजना से सोलर ऊर्जा और केसर दोनों से काफी मुनाफा प्राप्त हो सकता है।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने सावधानी भी बरती है और कहा है कि इस तकनीक के सफल कार्यान्वयन के लिए सोलर पैनलों की स्थापना और रखरखाव से संबंधित चुनौतियां भी हैं। इसके बावजूद, यह पद्धति शहरी इलाकों में टिकाऊ और आय-सृजन वाली खेती का एक वास्तविक विकल्प प्रस्तुत करती है।