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बैंकिंग में टिकाऊ वृद्धि के लिए सही जोखिम मूल्य निर्धारण जरूरी: आरबीआई
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा है कि बैंकिंग क्षेत्र में दीर्घकालीन और टिकाऊ वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सही तरीके से कर्ज देना, उचित जोखिम मूल्य निर्धारण, स्थिर जमाएं और मजबूत प्रशासन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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भारतीय रिजर्व बैंक के प्रबंध निदेशक स्वामीनाथन जे ने बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और विकास के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब बैंकिंग प्रणाली में तेजी से बदलाव आ रहे हैं, तब ऋण देने की प्रक्रिया में कठोरता बनाए रखना अत्यावश्यक है।
डिप्टी गवर्नर के अनुसार, सही तरीके से ऋण आंकलन करना और उचित जोखिम के आधार पर कीमत निर्धारण करना बैंकों के भविष्य के स्वास्थ्य के लिए आधारभूत है। वह मानते हैं कि गलत जोखिम मूल्य निर्धारण से बैंकों के पोर्टफोलियो में समस्याएं खड़ी हो सकती हैं और दीर्घकाल में यह संकट का कारण बन सकता है।
स्वामीनाथन जे ने स्थिर जमाओं के महत्व पर भी जोर दिया है, क्योंकि यह बैंकों की निधि प्रबंधन की नींव है। साथ ही, उन्होंने कहा कि मजबूत शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और नैतिक मानकों का पालन बैंकिंग संस्थानों में विश्वास और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
आरबीआई के नेतृत्व का यह संदेश भारतीय बैंकों को चेतावनी देता है कि आर्थिक दबाव के समय भी उन्हें अपने मूल सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करना चाहिए। उचित जोखिम प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण ऋण पोर्टफोलियो ही बैंकों को दीर्घमेयादी सफलता के पथ पर ले जा सकते हैं।