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Culture & Entertainment · India Bureau

दक्षिण भारतीय फिल्मों में 'ए' सर्टिफिकेट का चलन बढ़ रहा है

टॉक्सिक और जना नायगन जैसी बड़ी दक्षिण भारतीय फिल्मों का 'ए' सर्टिफिकेट के साथ रिलीज होना एक बदलती हुई प्रवृत्ति को दर्शाता है। निर्माता और सितारे अब अपनी फिल्मों को संपादित करने की बजाय सीमित दर्शकों के लिए रिलीज करना पसंद कर रहे हैं।

LSN India · 1 September 2026

दक्षिण भारत की फिल्म इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। निर्माता और प्रमुख सितारे अब अपनी फिल्मों को 'ए' सर्टिफिकेशन के साथ रिलीज करने के लिए तैयार दिख रहे हैं, जिसका अर्थ है कि ये फिल्में केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के दर्शकों के लिए उपयुक्त हैं।

इस प्रवृत्ति के पीछे का मुख्य कारण यह है कि निर्माता अपनी कृतियों में कटौती, संपादन और संशोधन करने से बचना चाहते हैं। पहले अधिकांश बड़ी फिल्मों को 'यू' या 'यूए' सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए काफी संपादन किया जाता था, लेकिन अब कलात्मक अखंडता को प्राथमिकता दी जा रही है।

टॉक्सिक और जना नायगन जैसी प्रमुख रिलीज़ों का 'ए' सर्टिफिकेट के साथ आना इस नई दिशा का प्रमाण है। इससे साफ़ है कि फिल्मकारों का एक बड़ा हिस्सा अपनी दृष्टि को बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण समझ रहा है, भले ही इससे संभावित दर्शक वर्ग कम हो।

इंडस्ट्री विशेषज्ञ इस प्रवृत्ति को सकारात्मक संकेत मानते हैं क्योंकि यह दर्शाता है कि निर्माता अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता के प्रति अधिक सचेत हो गए हैं। वयस्क दर्शकों का एक मजबूत बाजार है, और यह रणनीति आर्थिक रूप से भी व्यवहार्य साबित हो रही है।