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पढ़ने की आदत बढ़ाने के लिए नकद प्रोत्साहन दे रहा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश
डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग से पुस्तक पठन में आई गिरावट को लेकर चिंतित एक दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र ने अपने नागरिकों को पढ़ने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। इस प्रयास को सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है।
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डिजिटल मीडिया के प्रभुत्व में पारंपरिक पाठ्य संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से दक्षिण-पूर्व एशिया का एक छोटा सा देश एक अभिनव कदम उठाया है। ट्रेन स्टेशनों, कैफे और सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग को देखते हुए सरकार ने लोगों को किताबें पढ़ने के लिए नकद राशि प्रदान करने की योजना बनाई है।
यह पहल इस बात की स्वीकृति है कि स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरणों का व्यापक प्रसार परंपरागत पढ़ने की आदत को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आर्थिक प्रोत्साहन से जनता को किताबों की ओर लौटने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।
हालांकि, यह पहल सोशल मीडिया पर विभिन्न विचारों का कारण बना है। कुछ लोग इसे एक सराहनीय कदम मानते हैं जो साक्षरता को बढ़ावा देगा, जबकि अन्य का मानना है कि पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहन देने के लिए मौद्रिक प्रेरणा पर्याप्त नहीं है।
इस प्रयोग के परिणाम आने वाले महीनों में स्पष्ट होंगे, लेकिन यह सुनिश्चित है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में पुस्तक पठन को बढ़ाने के लिए नई रणनीतियों की खोज जारी है।