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दक्षिणी राज्य करों के न्यायसंगत वितरण की मांग, लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 पर रोक लगाएं
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों ने अपने राजकोषीय और राजनीतिक हितों की रक्षा की मांग की। क्षेत्र में अवसंरचना और आर्थिक एकीकरण के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
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दक्षिणी राज्यों ने केंद्रीय कराधान में अपना उचित हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत मामला प्रस्तुत किया है। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राजस्व वितरण के मौजूदा तंत्र को लेकर चिंता व्यक्त की गई और इसे और अधिक न्यायसंगत बनाने की अपील की गई।
राज्यों ने यह भी जोर दिया कि लोकसभा की सदस्य संख्या को 543 पर स्थिर रखा जाए। इस कदम का उद्देश्य दक्षिणी क्षेत्र की राजनीतिक प्रतिनिधित्व को संरक्षित रखना है, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम है।
बैठक में क्षेत्रीय अवसंरचना परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के विषयों पर भी गहन चर्चा हुई। सभी राज्यों ने दक्षिण एशिया में आर्थिक एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प दिया।
इन मांगों को क्षेत्रीय विकास और समग्र राष्ट्रीय हित को संतुलित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिणी राज्य केंद्रीय नीति निर्धारण में अपनी भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं।