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वास्तु दोष से पितृ दोष की पहचान करें, दक्षिण-पश्चिम दिशा पर दें ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में आने वाली खामियां पितृ दोष का संकेत देती हैं। जन्म कुंडली की जानकारी न हो तो वास्तु सिद्धांतों से भी इस दोष को समझा जा सकता है।
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वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पश्चिम दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है। इस दिशा में वास्तु संबंधी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को पितृ दोष का संकेत माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को अपनी जन्म कुंडली की पूरी जानकारी नहीं है तो वह वास्तु शास्त्र के माध्यम से भी संभावित वास्तु दोषों को समझ सकता है।
घर की इस दिशा की स्थिति का विश्लेषण करके पितृ दोष के संभावित संकेतों की पहचान की जा सकती है। वास्तु नियमों का पालन करते हुए दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र को व्यवस्थित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिशा में होने वाली कमियों को दूर करने के लिए वास्तु के नियमों का पालन किया जाता है।
वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर के किसी भी कोने में वास्तु संबंधी दोष होने से परिवार में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। इसलिए घर की सभी दिशाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। दक्षिण-पश्चिम दिशा को सशक्त रखने से घर में सकारात्मकता और शांति का वातावरण बना रहता है।