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CEC के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव: संसद के दोनों सदनों को मंजूरी जरूरी
लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ महाभियोग के लिए संसद के दोनों सदनों की स्वीकृति आवश्यक है। जांच समिति की रिपोर्ट में कदाचार साबित होने पर ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
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लोकसभा अध्यक्ष ने चुनाव आयोग के अध्यक्ष (CEC) के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव की संवैधानिक प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है।
उन्होंने बताया कि यदि जांच समिति की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकलता है कि CEC ने कोई कदाचार किया है अथवा उसमें कोई अक्षमता है, तो उस प्रस्ताव और समिति की रिपोर्ट को संसद के उस सदन में विचार के लिए रखा जाएगा जहां यह प्रस्ताव लंबित है।
अध्यक्ष के अनुसार, इसके बाद संसद के दोनों सदनों को संविधान के अनुच्छेद 218 के प्रावधानों के अनुसार इस प्रस्ताव को पारित करना होगा। केवल तभी यह माना जाएगा कि CEC का कदाचार या अक्षमता साबित हो गई है।
यह प्रक्रिया संविधान द्वारा निर्धारित की गई है और सर्वोच्च संवैधानिक मानदंडों के अनुसार की जाती है। महाभियोग प्रस्ताव के लिए संसद के दोनों सदनों की सहमति प्राप्त करना अनिवार्य है।