World · India Bureau
ब्रह्म मुहूर्त में जागरण आध्यात्मिक साधना की कुंजी: प्रेमानंद महाराज
आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के अनुसार, सूर्योदय से पहले उठना साधकों के लिए अनिवार्य है। शास्त्रीय परंपरा में ब्रह्म मुहूर्त को भजन, जप और ध्यान के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है।
LSN India ·

आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले साधकों के लिए दिनचर्या का विशेष महत्व है। इसी संदर्भ में प्रेमानंद महाराज ने कहा है कि किसी विशेष कारण के बिना देर तक सोते रहना साधक के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। गुरु के अनुसार, सभी धार्मिक ग्रंथ और महापुरुष इस बात पर सहमत हैं।
वैदिक परंपरा में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का सबसे पवित्र समय माना गया है। प्रेमानंद महाराज के मार्गदर्शन में सामान्य साधकों को सुबह 2 से 4 बजे के बीच जागना चाहिए। इसी समय में भजन, जप और ध्यान का अभ्यास करने से मन अधिक शांत और केंद्रित रहता है।
महाराज के अनुसार, इस समय का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है। प्रकृति भी इस समय अपने सबसे शांत और पवित्र रूप में होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि ब्रह्म मुहूर्त में किया गया कोई भी आध्यात्मिक कार्य अधिक फलप्रद होता है।
आधुनिक जीवनशैली में भले ही यह अभ्यास कठिन लगे, किंतु प्रेमानंद महाराज का मानना है कि नियमित अभ्यास से साधक इसे आसानी से अपना सकते हैं। धैर्य और निरंतरता से ब्रह्म मुहूर्त में उठने की आदत डालने से आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर तेजी से प्रगति होती है।