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कश्मीर में प्रतिबंधित जमात के गुटों में विचारधारा को लेकर तनाव
जमात-ए-इस्लामी के अलगववादी गुट के नेताओं ने श्रीनगर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके विरोधियों द्वारा समर्थकों के बीच संदेह पैदा करने की कोशिश की जा रही है। नेताओं का आरोप है कि उन्हें 'देशद्रोही' और 'विश्वासघाती' जैसे लेबल लगाकर संगठन को विभाजित किया जा रहा है।
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कश्मीर में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के टूटे हुए गुट के नेताओं ने संगठन के भीतर गहरे मतभेदों को सामने लाया है। श्रीनगर में एक प्रेस वार्ता में गुलाम कादिर वानी और अहमदुल्ला परे मलिक समेत अलगववादी गुट के शीर्ष नेताओं ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष उनके समर्थकों के बीच संदेह और भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
इन नेताओं के अनुसार, विरोधी गुट 'देशद्रोही' और 'विश्वासघाती' जैसे गंभीर आरोपों का इस्तेमाल करके संगठन के आंतरिक ताने-बाने को कमजोर करने की रणनीति अपना रहा है। उनका कहना है कि ये आरोप बेबुनियाद हैं और केवल संगठन को विभाजित करने के लिए लगाए जा रहे हैं।
अलगववादी गुट ने दावा किया कि संगठन के विचारधारात्मक मूल्यों में परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है, जिससे सदस्यों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने संगठन की संपत्ति और संसाधनों के नियंत्रण को लेकर भी विवाद का संकेत दिया है।
यह विवाद दर्शाता है कि प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी आंतरिक विभाजन का सामना कर रहा है। नेताओं ने इस स्थिति को समाप्त करने के लिए संवाद और सामंजस्य का आह्वान किया है। कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियों की निगरानी कर रहे विश्लेषकों के लिए यह विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।