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भारत-श्रीलंका संबंध मजबूत: राष्ट्रपति ने कछातीवु पर भारत का रुख सराहा
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा है कि भारत ने अपने सर्वोच्च न्यायालय में स्वीकार किया है कि कछातीवु द्वीप श्रीलंका का है। भारतीय महाधिवक्ता ने गत सप्ताह अदालत को बताया कि भारत 1974 और 1976 के समझौतों को दोबारा खोलने का इरादा नहीं रखता।
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श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारसिंघे ने भारत के साथ संबंधों की स्थिति पर सकारात्मक टिप्पणी करते हुए कहा है कि नई दिल्ली ने कछातीवु द्वीप के मामले में एक जिम्मेदारी भरा रुख अपनाया है।
राष्ट्रपति के अनुसार, भारत ने अपने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्पष्ट किया है कि कछातीवु द्वीप श्रीलंका की संप्रभु संपत्ति है। यह भारत की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो द्विपक्षीय संबंधों में स्पष्टता लाता है।
भारतीय महाधिवक्ता राव वेंकटारमण ने पिछले हफ्ते भारत के सर्वोच्च न्यायालय में स्पष्ट किया था कि भारत सरकार 1974 और 1976 के बीच हुए कछातीवु समझौतों को दोबारा परिचर्चा के लिए नहीं खोलना चाहती है। यह घोषणा भारत की दीर्घकालिक नीति को दर्शाती है।
श्रीलंकाई राष्ट्रपति का यह बयान दक्षिण एशिया में भारत और श्रीलंका के बीच सुस्थिर संबंधों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और भौगोलिक समीपता के बावजूद, विवादास्पद मुद्दों को सूझबूझ से संभालना दोनों राष्ट्रों के हित में माना जा रहा है।