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आपातकाल में स्टालिन को जेल में प्रताड़ना का सामना करना पड़ा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आपातकाल के दौरान मद्रास सेंट्रल जेल में कई महीने बिताए। न्यायमूर्ति एम.एम. इस्माइल आयोग के समक्ष उन्होंने जेल अधिकारियों द्वारा की गई क्रूरता की विस्तार से चर्चा की।
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तमिलनाडु के वर्तमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आपातकाल के दौरान भारत की राजनीतिक कैदियों की पीड़ा का सामना किया था। मात्र 23 साल की उम्र में स्टालिन को मद्रास सेंट्रल जेल में कई महीनों के लिए कैद रखा गया था।
जेल में स्टालिन को साथ रहने वाले सात अन्य कैदियों के साथ कठोर व्यवहार झेलना पड़ा। जेल के अधिकारियों द्वारा उन्हें शारीरिक प्रताड़ना दी गई और हीन भोजन प्रदान किया गया। इस अवधि में वे विभिन्न प्रकार की मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरे।
बाद में न्यायमूर्ति एम.एम. इस्माइल आयोग के समक्ष साक्ष्य देते हुए स्टालिन ने इन घटनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जेल प्रशासन द्वारा कैदियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया। यह साक्ष्य आपातकाल के दौरान होने वाली मानवाधिकार की खामियों को उजागर करता है।
स्टालिन की यह गवाही आपातकाल के अंधकारमय अध्याय का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज बन गई है। यह घटना उस समय की राजनीतिक कैदियों की दशा को दर्शाती है और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।