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आरबीआई की दरें बढ़ने के बाद सरकारी बैंकों ने उधार दरें महंगी कीं
भारतीय रिजर्व बैंक की नीति दर में वृद्धि के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन बैंक सहित कई सरकारी बैंकों ने रेपो-लिंक्ड उधार दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। इससे कर्जदारों के लिए कर्ज लेना और महंगा हो गया है।
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भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीति दरों में हाल की बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपनी रेपो-लिंक्ड उधार दरों को संशोधित किया है। बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन बैंक समेत कई बैंकों ने इन दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की घोषणा की है।
यह कदम आरबीआई की मौद्रिक नीति निर्णय के सीधे परिणाम के रूप में आया है। रेपो-लिंक्ड उधार दरों से जुड़ी होने के कारण, बैंकों को मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक की दरों में बदलाव के अनुसार अपनी दरें समायोजित करनी पड़ती हैं।
इस बढ़ोतरी से आवास ऋण, व्यक्तिगत ऋण और अन्य उपभोक्ता ऋणों की लागत में वृद्धि हुई है। उधारकर्ताओं को अपने मौजूदा और नए कर्जों पर अधिक ब्याज अदा करना होगा, जिससे उनके मासिक ईएमआई में बढ़ोतरी हो सकती है।
इंडस्ट्री विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति अन्य निजी बैंकों को भी अपनी दरें समायोजित करने के लिए प्रेरित कर सकती है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति द्वारा दरें बढ़ाने का लक्ष्य महंगाई को नियंत्रित करना है, लेकिन इसका असर सीधे आम उधारकर्ताओं के बटुए पर पड़ता है।