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राज्यों का पूंजीगत व्यय FY27 में 10-12% बढ़कर 8.5 ट्रिलियन रुपये हो सकता है
केंद्रीय सहायता और राजकोषीय क्षमता में सुधार से राज्यों के पूंजीगत खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश इस वृद्धि का मुख्य चालक बनने वाला है।
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क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राज्यों का पूंजीगत व्यय वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8.5 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह बढ़ोतरी केंद्रीय सहायता में वृद्धि और राज्यों की राजकोषीय स्थिति में सुधार के कारण संभव हो पाएगी।
स्टेट असिस्टेंस फॉर कैपिटल इंवेस्टमेंट स्कीम (एसएएससीआई) के तहत केंद्रीय सहयोग में वृद्धि राज्यों को उनके विकास कार्यक्रमों में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। साथ ही, राज्यों की बेहतर आर्थिक स्थिति उन्हें स्वयं के संसाधनों से अधिक पूंजीगत परियोजनाओं को वित्तपोषित करने में सक्षम बनाएगी।
इस अवधि में शहरी बुनियादी ढांचा विकास पूंजीगत व्यय का प्रमुख क्षेत्र होगा। नगरीय विकास, परिवहन नेटवर्क और जल-स्वच्छता जैसी परियोजनाओं में राज्यों की ओर से महत्वपूर्ण निवेश की प्रत्याशा है, विशेषकर वित्तीय वर्ष के दूसरे अर्धकाल में।
यह प्रवृत्ति आर्थिक विकास को गति देने के साथ ही रोजगार सृजन में भी योगदान देगी। बुनियादी ढांचे में बढ़े हुए निवेश से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और दीर्घकालीन विकास के नए अवसर सृजित होंगे।