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दालों की कमी से जूझ रही केंद्र सरकार, राज्यों की मांग बढ़ी
प्रमुख दाल उत्पादक क्षेत्रों में अनावृष्टि और सूखाग्रस्त परिस्थितियों ने उत्पादन को प्रभावित किया है। अरहर और चने की कीमतों में उछाल के बीच राज्य सरकारें केंद्र से आपूर्ति बढ़ाने की मांग कर रही हैं।
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देश के प्रमुख दाल उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की स्थिति के कारण उत्पादन में गिरावट आई है, जिससे अरहर और चने की कीमतें आसमान छू गई हैं। इस संकट के बीच कई राज्य सरकारें केंद्र सरकार से दालों की आपूर्ति बढ़ाने की मांग कर रही हैं ताकि बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखा जा सके।
अपर्याप्त वर्षा और सूखाग्रस्त परिस्थितियों ने मध्य भारत और अन्य प्रमुख दाल उत्पादक क्षेत्रों में फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस मौसम में दालों का उत्पादन प्रत्याशित स्तर से कम रहा है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति की कमी हुई है।
दालों की बढ़ती कीमतों से आम उपभोक्ताओं के बजट पर असर पड़ रहा है। राज्य सरकारें जनता को राहत देने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से सब्सिडी वाली दालें उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही हैं, किंतु इसके लिए उन्हें केंद्रीय स्टॉक से आपूर्ति की आवश्यकता है।
कृषि मंत्रालय ने इस स्थिति से निपटने के लिए आयात को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में यदि मानसून सामान्य हो तो अगली फसल में स्थिति में सुधार आ सकता है, लेकिन वर्तमान में बाजार में कीमतों को नियंत्रित करना सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है।