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नवीकरणीय ऊर्जा संकट के बीच तापीय विद्युत को 2.4 ट्रिलियन रुपये का निवेश
भारत के राज्यों ने वित्तीय वर्ष 2025 और 2026 में 18.2 गीगावाट की नई तापीय क्षमता को मंजूरी दी है, जिसके लिए अनुमानित 2.3 से 2.4 लाख करोड़ रुपये की पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी।
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नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में आपूर्ति की कमी के बीच भारत के राज्य तापीय विद्युत संयंत्रों में भारी निवेश कर रहे हैं। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि राज्यों ने चालू वित्तीय वर्ष और आने वाले वर्ष में कुल 18.2 गीगावाट की ताजा तापीय क्षमता को मंजूरी दी है।
इस विस्तार के लिए अनुमानित 2.3 से 2.4 लाख करोड़ रुपये की प्रतिबद्ध पूंजी की आवश्यकता होगी। यह निवेश राष्ट्रीय विद्युत नीति के तहत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्यों की चिंता को दर्शाता है।
ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में देरी और मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण राज्य पारंपरिक तापीय विद्युत पर निर्भर बने हुए हैं। इस रणनीति से अगले कुछ वर्षों में देश की विद्युत आपूर्ति में स्थिरता आने की संभावना है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश न केवल विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में भी योगदान देगा। साथ ही, राज्यों को आने वाले वर्षों में बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने के लिए इस तरह की क्षमता की आवश्यकता होगी।